ज्योतिषाचार्य गुरुजी प्रशांत खळे का संकल्पमहादेव की कृपा, प्रभु श्रीराम की प्रेरणा तथा माँ सरयू की दिव्य चेतना से प्रेरित होकर मेरा संकल्प है कि भारत तथा सम्पूर्ण विश्व में अश्वमेध गुरुकुल की स्थापना कर सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान, आधुनिक विज्ञान तथा आत्मनिर्भर समाज का निर्माण किया जाए।
1. भारत के 770 जिलों में अश्वमेध गुरुकुल की स्थापनाउद्देश्यभारत के प्रत्येक जिले में कम से कम एक अश्वमेध गुरुकुल स्थापित करना।इसके माध्यम से• प्रत्येक सनातनी परिवार तक शिक्षा पहुँचाना।• संस्कारयुक्त नई पीढ़ी का निर्माण करना।• प्राचीन गुरुकुल व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देना।• स्थानीय स्तर पर शिक्षा एवं रोजगार के अवसर उत्पन्न करना।• प्रत्येक जिले में आध्यात्मिक एवं सामाजिक नेतृत्व तैयार करना।अंतिम लक्ष्य770 जिलों में सफल मॉडल स्थापित करने के बाद प्रत्येक जनपद, तहसील और गाँव तक गुरुकुल पहुँचाना।
2. 10,000+ Skillful Education एवं आधुनिक शिक्षाउद्देश्यहर विद्यार्थी को जीवनोपयोगी शिक्षा देना।
इसमें शामिल होंगे
• वेद, उपनिषद, गीता एवं अन्य शास्त्र• योग, ध्यान एवं प्राणायाम
• विज्ञान एवं अनुसंधान
• Artificial Intelligence (AI)• Robotics• Space Science• Computer एवं Digital Technology
• Cyber Security• Digital Marketing
.• Coding एवं Software Development
• Entrepreneurship• Financial Education
• Agriculture एवं Natural Farming
• Ayurveda एवं Wellness
• Self Defence
• Personality Development
• Communication Skills
• Leadership Training
• 10,000 से अधिक Skill-Based Courses अंतिम लक्ष्यसिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि योग्य, कुशल एवं आत्मनिर्भर नागरिक तैयार करना।
3. प्रत्येक सनातनी का सर्वांगीण विकासशारीरिक विकास• योग• व्यायाम• सूर्य नमस्कार• आत्मरक्षा प्रशिक्षण• सात्त्विक जीवनशैलीमानसिक विकास• ध्यान• एकाग्रता• सकारात्मक सोच• तनावमुक्त जीवन• चरित्र निर्माणआर्थिक विकास• व्यवसाय प्रशिक्षण• रोजगार निर्माण• स्टार्टअप मार्गदर्शन• निवेश एवं वित्तीय शिक्षा• आत्मनिर्भरतासामाजिक विकास• सेवा कार्य• राष्ट्र निर्माण• परिवार सशक्तिकरण• महिला एवं युवा विकास• सामाजिक नेतृत्वआध्यात्मिक विकास• ईश्वर भक्ति• यज्ञ• मंत्र साधना• संस्कार• धर्म अध्ययनअंतिम लक्ष्यएक आदर्श, स्वस्थ, समृद्ध एवं संस्कारित समाज का निर्माण।
4. धर्म की पुनः स्थापनाउद्देश्यसनातन धर्म के वास्तविक ज्ञान का पुनः प्रचार-प्रसार।प्रमुख कार्य• धर्म शिक्षा• संस्कार शिक्षा• यज्ञ एवं वैदिक परंपराएँ• भारतीय संस्कृति का संरक्षण• धार्मिक सद्भाव• "वसुधैव कुटुम्बकम्" का प्रसारअंतिम लक्ष्यविश्व में सनातन जीवन मूल्यों का पुनर्जागरण।
5. विश्वव्यापी अश्वमेध गुरुकुलउद्देश्यभारत के बाद विश्व के प्रत्येक प्रमुख देश में अश्वमेध गुरुकुल स्थापित करना।संभावित देश• अश्वमेध गुरुकुल दुबई• अश्वमेध गुरुकुल कतर• अश्वमेध गुरुकुल अमेरिका• अश्वमेध गुरुकुल न्यूयॉर्क• अश्वमेध गुरुकुल कनाडा• अश्वमेध गुरुकुल जर्मनी• अश्वमेध गुरुकुल इंग्लैंड• अश्वमेध गुरुकुल ऑस्ट्रेलिया• अश्वमेध गुरुकुल सिंगापुर• अश्वमेध गुरुकुल जापान• अश्वमेध गुरुकुल मॉरीशस• अश्वमेध गुरुकुल नेपाल• अश्वमेध गुरुकुल श्रीलंका• अश्वमेध गुरुकुल दक्षिण अफ्रीका• अन्य सभी प्रमुख राष्ट्रअंतिम लक्ष्यविश्वभर के सनातनी समाज को एक साझा शिक्षा एवं संस्कार प्रणाली से जोड़ना।
6. कौशल आधारित शिक्षा द्वारा आत्मनिर्भर भारतउद्देश्यहर विद्यार्थी को व्यवसाय करने योग्य बनाना।इसके अंतर्गत• Business Training• Startup Training• Franchise Model• Manufacturing• Service Industry• Digital Business• Agriculture Business• Import-Export• Online Business• रोजगार सृजनलक्ष्यप्रत्येक विद्यार्थी स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ करे तथा अन्य लोगों को भी रोजगार दे।
7. गुरुदक्षिणा संकल्पउद्देश्यगुरुकुल को आत्मनिर्भर बनाना।संकल्प• विद्यार्थी अपनी इच्छा से व्यवसाय के लाभ का 25% गुरुदक्षिणा स्वरूप समर्पित करेगा।• इस राशि का उपयोग नए गुरुकुलों की स्थापना में होगा।• निर्धन विद्यार्थियों की शिक्षा में सहयोग होगा।• समाजसेवा एवं राष्ट्र निर्माण के कार्य किए जाएंगे।अंतिम लक्ष्यदान आधारित नहीं, बल्कि सेवा आधारित शिक्षा व्यवस्था विकसित करना।
8. भविष्य का संकल्पउद्देश्यसम्पूर्ण मानवता का कल्याण।संकल्प• शिक्षा सभी के लिए सुलभ हो।• स्वास्थ्य सभी के लिए सुलभ हो।• कोई भी व्यक्ति आर्थिक कारणों से शिक्षा या उपचार से वंचित न रहे।• सेवा आधारित वैश्विक व्यवस्था विकसित हो।अंतिम लक्ष्यज्ञान एवं स्वास्थ्य से समृद्ध विश्व।
9. महादेव की आज्ञा का पालनउद्देश्यमानव सेवा को ईश्वर सेवा मानकर कार्य करना।विश्वासगुरुजी ज्योतिषाचार्य प्रशांत खळेजी का विश्वास है कि वे महादेव की प्रेरणा एवं आज्ञा के अनुसार इस मिशन को पूर्ण करने का प्रयास कर रहे हैं।कार्य• समाज सेवा• धर्म सेवा• शिक्षा सेवा• राष्ट्र सेवा• विश्व कल्याणअंतिम लक्ष्यमहादेव की प्रेरणा को कर्म के माध्यम से साकार करना।
10. जनपद प्रमुख क्यों बनाए गए?
उद्देश्य770 जिलों में गुरुकुल स्थापना के लिए स्थानीय नेतृत्व तैयार करना।जनपद प्रमुख की जिम्मेदारियाँ
1. अपने क्षेत्र में अश्वमेध गुरुकुल स्थापित करना।
2. नए कार्यकर्ताओं को जोड़ना।
3. आचार्य एवं शिक्षकों का निर्माण करना।
4. समाज को संगठित करना।
5. प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
6. सेवा परियोजनाएँ चलाना।
7. स्थानीय दानदाताओं एवं सहयोगियों को जोड़ना।
8. युवाओं को रोजगार एवं कौशल प्रशिक्षण से जोड़ना।
9. गुरुकुल की शाखाओं का विस्तार करना।
अंतिम लक्ष्यप्रत्येक जनपद प्रमुख अपने क्षेत्र में गुरुजी के संकल्प को साकार करने वाला नेतृत्वकर्ता बने।
हमारा मूल मंत्रज्ञान • संस्कार • विज्ञान • कौशल • आत्मनिर्भरता • धर्म • सेवा • राष्ट्र निर्माण • विश्व कल्याणअंतिम संकल्प"770 जिलों से प्रारम्भ होकर सम्पूर्ण विश्व तक अश्वमेध गुरुकुल की स्थापना कर ज्ञान, संस्कार, विज्ञान, आत्मनिर्भरता और सनातन जीवन मूल्यों का प्रकाश प्रत्येक मानव तक पहुँचाना।"
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